भाषा और कहानी • कक्षा 9–12
शब्द ही नहीं, भाव भी
हर मुहावरा शब्दशः समझ नहीं आता।
आराम से सीखें। जवाब बोलें, बनाएँ या लिखें।
बात यह है…
अनुवाद भाषाओं और सन्दर्भों के बीच अर्थ पहुँचाता है। मुहावरे में शब्दशः बदलने के बजाय अर्थ समझाना पड़ सकता है। लहजा भी महत्त्वपूर्ण है: औपचारिक सूचना और दोस्ताना निमन्त्रण समान बात अलग ढंग से कह सकते हैं। सही सन्दर्भ जानने वाले पाठक से अनुवाद जाँचें।
रुको। बात अपने ढंग से समझो।
एक बात साथी को समझाओ, चित्र बनाओ या अपने शब्दों में लिखो। कौन-सा हिस्सा अवलोकन, उदाहरण या सवाल है?
घर की भाषा भी ले सकते हो। निजी अनुभव बताना या सब एक बार में पूरा करना ज़रूरी नहीं।अब आपकी खोज
क्या चाहिए
कागज़ और पेंसिल, या बातचीत का साथी। चित्र बनाकर और बोलकर भी कर सकते हैं।
“Let us make everyone feel welcome” को सहज हिन्दी में कहें।
दो पाठक-समूहों के लिए औपचारिक और दोस्ताना रूप लिखें।
साथी से दोनों के अर्थ पूछें और भ्रम देने वाला वाक्य सुधारें।
उपयोगी अनुवाद में क्या बचना चाहिए?
पूछते रहो
अपने समूह की सभी गतिविधियाँ
ज्ञानकलाकुंभज्ञान। कला। संभावनाएँ।